शिष्यत्व ~ परम सौभाग्य !!!
शिष्य होना बड़ी कठिन बात है। इस संसार में उससे ज्यादा कठिन बात कोई भी नहीं। क्योंकि शिष्य होने का अर्थ है कि हमने किसी और का सहारा पकड़ लिय...
शिष्य होना बड़ी कठिन बात है। इस संसार में उससे ज्यादा कठिन बात कोई भी नहीं। क्योंकि शिष्य होने का अर्थ है कि हमने किसी और का सहारा पकड़ लिय...
सदगुरु तुम्हें कंप्यूटर बना देने में उत्सुक नहीं है। उसकी उत्सुकता है कि तुम स्वयं प्रकाश बनो, तुम्हारा अस्तित्व प्रामाणिक बने, एक अम...
रहस्य-विद्यालय का कार्य है कि गुरु बोले या मौन रहे, तुम्हारी और देखे या कोई संकेत करे, या बंद आंखें किए बस मात्र बैठा रहे- वह ऊर्जा का...
नाव मिली केवट नहीं, कैसे उतरै पार।। कैसे उतरै पर पथिक विश्वास न आवै। समझो। नाव तो मिल सकती है। नाव तो मुर्दा है। लेकिन जब ...
गुरु को सिर पर राखिये, चलिए आज्ञा माहिं। क्या मतलब? गुरु को सिर पर रखना आसान, आज्ञा मानकर चलना कठिन। लेकिन आज्ञा मानकर चलना ही सिर पर रखने...
स्परिट वर्ल्ड का पवित्रतम उच्चलोक जिसे सन्तों, सिद्धों ने बैकुंठ, गोलोक, सतलोक... कहा। और आज के बहुत बड़े past life regresionist - Dr...
धीरजवंत अडिंग जितेंद्रिय निर्मल ज्ञान गहयौ दृढ़ आदू। शील संतोष क्षमा जिनके घट लगी रहयौ सु अनाहद नादू।। मेष न पक्ष निरंतर लक...
कृष्णमूर्ति को सस्ते में गुरु मिले, इसलिए गुरु की महत्ता कभी समझ में न आई। मुफ्त जो मिल जाए उसकी महत्ता समझ में नहीं आती। कृष्णमू...
मैं स्वामी सुखराज भारती अपनी समग्रता से स्वीकार करता हूँ कि मैं पूरा खोखला खड़ा था। बातों का जमा खर्च कर रहा था। आज मैं 30 वर्ष पुराना स...
सदगुरु तुम्हें कंप्यूटर बना देने में उत्सुक नहीं है। उसकी उत्सुकता है कि तुम स्वयं प्रकाश बनो, तुम्हारा अस्तित्व प्रामाणिक बने, एक अम...
धन्य है यह अध्यात्म की उर्वर भूमि भारत, जो निरंतर सद्गुरुओं को पैदा किये जा रही है। इसी क्रम में सनातनधर्म को पुनः प्रतिष्ठित करने के लिए इस पावन धरा पर अवतरित हुए परमगुरु ओशो के सदशिष्य गुरुदेव सिद्धार्थ औलिया जी जिन्होंने अपने गुरु ओशो के स्वप्न को ओशोधारा रूपी रहस्य विद्यालय में प्रयोगात्मक रूप से प्रकट कर दिया है। उनके ही गुरु प्रेम से ओतप्रोत विराट जीवन की संक्षिप्त झांकी को इस blog के माध्यम से प्रकट करने का प्रयास किया जा रहा है ऐसा समझें कि सागर को गागर में भरने का प्रयास! सभी प्रभु प्यासों को गुरुदेव के साथ प्रभु की इस महिमामयी यात्रा का आमंत्रण है। गुरुदेव की अपार करुणा से अब सभी के लिए प्रभु के द्वार खुल गए हैं। अब हम इस आपाधापी भरे जीवन में भी गुरुदेव के मार्गदर्शन में प्रभु को जान कर उसके प्रेम में जी सकते हैं। और इस संसार में कमलवत रहकर अपने सारे दायित्वों को निभाते हुए, जीने का मज़ा ले सकते हैं।आइए हम सभी भारत को, सनातनधर्म को पुनः उसकी उत्तुंग आध्यात्मिक ऊंचाइयों में प्रतिष्ठित करें। 🕉️🙏जय गुरुदेव🙏🕉️ जागरण सिद्धार्थ
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